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वाल्मीकि रामायण 28.55

निवृत्त कर्म आयतनो नूनम् संचित संचयः ।
आषाढीम् अभ्युपगतो भरतः कोसल अधिपः ॥४-२८-५५॥

पूरा अध्याय