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वाल्मीकि रामायण 28.45

वर्ष प्रवेगा विपुला पतन्तिप्रवान्ति वाताः समुदीर्ण वेगाः ।
प्रनष्ट कूलाः प्रवहन्ति शीघ्रम्नद्यो जलम् विप्रतिपन्न मार्गाः ॥४-२८-४५॥

पूरा अध्याय