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वाल्मीकि रामायण 28.39

नद्यः समुद्वाहित चक्रवाकातटानि शीर्णानि अपवाहयित्वा ।
दृप्ता नव प्राभृत पूर्ण भोगाद्रुतम् स्व भर्तारम् उपोप यान्ति ॥४-२८-३९॥

पूरा अध्याय