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वाल्मीकि रामायण 28.30

अंगार चूर्ण उत्कर संनिकाशैःफलैः सुपर्याप्त रसैः समृद्धैः ।
जंबू द्रुमाणाम् प्रविभान्ति शाखानिपीयमाना इव षट्पद ओघैः ॥४-२८-३०॥

पूरा अध्याय