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वाल्मीकि रामायण 28.15

रजः प्रशांतम् स हिमो अद्य वायुःनिदाघ दोष प्रसराः प्रशांताः ।
स्थिता हि यात्रा वसुधा अधिपानाम्प्रवासिनो यांति नराः स्व देशान् ॥४-२८-१५॥

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