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वाल्मीकि रामायण 27.6

विनीतम् भ्रातरम् भ्राता लक्ष्मणम् लक्ष्मि वर्धनम् ।
इयम् गिरि गुहा रम्या विशाला युक्त मारुता ॥४-२७-६॥

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