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वाल्मीकि रामायण 27.39

शरत् कालम् प्रतीक्षस्व प्रावृट् कालो अयम् आगतः ।
ततः स राष्ट्रम् स गणाम् रावणम् तम् वधिष्यसि ॥४-२७-३९॥

पूरा अध्याय