Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 27.37

समुन्मूलय शोकम् त्वम् व्यवसायम् स्थिरी कुरु ।
ततः सपरिवारम् तम् राक्षसम् हन्तुम् अर्हसि ॥४-२७-३७॥

पूरा अध्याय