ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 2727.21वाल्मीकि रामायण 27.21पुलिनैः अति रम्यैः च हंस सारस सेविता । प्रहसंती इव भाति एषा नारी रत्न विभूषिता ॥४-२७-२१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय