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वाल्मीकि रामायण 25.9

इतः स्वाम् प्रकृतिम् वाली गतः प्राप्तः क्रिया फलम् ।
साम दान अर्थ संयोगैः पवित्रम् प्लवग ईश्वर ॥४-२५-९॥

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