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वाल्मीकि रामायण 25.50

ततो अग्निम् विधिवत् दत्त्वा सो अपसव्यम् चकार ह ।
पितरम् दीर्घम् अध्वानम् प्रस्थितम् व्याकुल इन्द्रियः ॥४-२५-५०॥

पूरा अध्याय