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वाल्मीकि रामायण 25.27

ईदृशी शिबिकाम् दृष्ट्वा रमो लक्ष्मणम् अब्रवीत् ।
क्षिप्रम् विनीयताम् वली प्रेत कार्यम् विधीयताम् ॥४-२५-२७॥

पूरा अध्याय