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वाल्मीकि रामायण 25.22

दिव्याम् भद्र आसन युताम् शिबिकाम् स्यंदन उपमम् ।
पक्षि कर्मभिः आचित्राम् द्रुम कर्म विभूषिताम् ॥४-२५-२२॥

पूरा अध्याय