ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 2525.15वाल्मीकि रामायण 25.15समाश्वासय दीनम् त्वम् अंगदम् दीन चेतसम् । मा भूः बालिश बुद्धिः त्वम् त्वत् अधीनम् इदम् पुरम् ॥४-२५-१५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय