ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 2424.44वाल्मीकि रामायण 24.44आश्वासिता तेन महत्मना तु प्रभाव युक्तेन परंतपेन । सा वीर पत्नी ध्वनता मुखेन सुवेष रूपा विरराम् तारा ॥४-२४-४४॥पिछलापूरा अध्याय