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वाल्मीकि रामायण 24.32

त्वम् आत्त बाणासन बाण पाणिः महाबलः संहनन उपपन्नः ।
मनुष्य देहाभुदयम् विहाय दिव्येन देहाभ्युदयेन युक्तः ॥४-२४-३२॥

पूरा अध्याय