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वाल्मीकि रामायण 24.30

तम् सा समासाद्य विशुद्ध सत्त्वम् शोकेन संभ्रांत शरीर भावा ।
मनस्विनी वाक्यम् उवाच तारा रामम् रण उत्कर्षण लब्ध लक्ष्यम् ॥४-२४-३०॥

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