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वाल्मीकि रामायण 23.25

भुजाभ्याम् पीन वृताभ्याम् अंगदो अहम् इति ब्रुवन् ।
अभिवादयमानम् त्वाम् अंगदम् त्वम् यथा पुरा ॥४-२३-२५॥

पूरा अध्याय