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वाल्मीकि रामायण 22.8

सुखार्हम् सुख संवृद्धम् बालम् एनम् अबालिशम् ।
बाष्प पूर्ण मुखम् पश्य भूमौ पतितम् अंगदम् ॥४-२२-८॥

पूरा अध्याय