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वाल्मीकि रामायण 22.5

प्रतिपद्य त्वम् अद्य एव राज्यम् एषाम् वन ओकसाम् ।
माम् अपि अद्य एव गच्छंतम् विद्धि वैवस्वत क्षयम् ॥४-२२-५॥

पूरा अध्याय