ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 2222.20वाल्मीकि रामायण 22.20देश कालौ भजस्व अद्य क्षममाणः प्रिय अप्रिये । सुख दुःख सहः काले सुग्रीव वशगो भव ॥४-२२-२०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय