ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 2020.9वाल्मीकि रामायण 20.9निरानंदा निराशा अहम् निमग्ना शोक सागरे । त्वयि पंचत्वम् आपन्ने महायूथप यूथपे ॥४-२०-९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय