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वाल्मीकि रामायण 20.5

उत्तिष्ठ हरि शार्दूल भजस्व शयन उत्तमम् ।
न एवम् विधाः शेरते हि भूमौ नृपति सत्तमाः ॥४-२०-५॥

पूरा अध्याय