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वाल्मीकि रामायण 20.21

सकामो भव सुग्रीव रुमाम् त्वम् प्रतिपत्स्यसे ।
भुंक्ष्व राज्यम् अनुद्विग्नः शस्तो भ्राता रिपुः तव ॥४-२०-२१॥

पूरा अध्याय