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वाल्मीकि रामायण 20.16

वैधव्यम् शोक संतापम् कृपणम् अकृपणा सती ।
अदुह्ख उपचिता पूर्वम् वर्तयिष्यामि अनाथवत् ॥४-२०-१६॥

पूरा अध्याय