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वाल्मीकि रामायण 19.25

अवष्टभ्य अवतिष्ठंतम् ददर्श धनुर् ऊर्जितम् ।
रामम् रामानुजम् चैव भर्तुः चैव तथा अनुजम् ॥४-१९-२५॥

पूरा अध्याय