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वाल्मीकि रामायण 18.6

इक्ष्वाकूणाम् इयम् भूमिः स शैल वन कानना ।
मृग पक्षि मनुष्याणाम् निग्रह अनुग्रहेषु अपि ॥४-१८-६॥

पूरा अध्याय