ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1818.48वाल्मीकि रामायण 18.48माम् अपि अवगतम् धर्मात् व्यतिक्रान्त पुरस्कृतम् । धर्म संहितया वाचा धर्मज्ञ परिपालय ॥४-१८-४८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय