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वाल्मीकि रामायण 18.2

तं निष्प्रभम् इव आदित्यं मुक्त तोयम् इवाम्बुदम् ।
उक्त वाक्यं हरि श्रेष्ठम् उपशांतम् इवानलम् ॥४-१८-२॥

पूरा अध्याय