ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1717.6वाल्मीकि रामायण 17.6स तया मालया वीरो हैमया हरियूथपः । संध्यानुगत पर्यन्तः पयोधर इव अभवत् ॥४-१७-६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय