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वाल्मीकि रामायण 17.54

इति एवम् उक्त्वा परिशुष्क वक्त्रःशर अभिघातात् व्यथितो महात्मा ।
समीक्ष्य रामम् रवि संनिकाशम्तूष्णीम् बभौ वानर राज सूनुः ॥४-१७-५४॥

पूरा अध्याय