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वाल्मीकि रामायण 17.44

छिन्न चारित्र्य कक्ष्येण सताम् धर्म अतिवर्तिना ।
त्यक्त धर्म अंकुशेन अहम् निहतो राम हस्तिना ॥४-१७-४४॥

पूरा अध्याय