ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1717.42वाल्मीकि रामायण 17.42त्वया नाथेन काकुत्स्थ न सनाथा वसुंधरा । प्रमदा शील संपूर्णा पति एव च विधर्मिणा ॥४-१७-४२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय