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वाल्मीकि रामायण 17.25

फल मूल अशनम् नित्यम् वानरम् वन गोचरम् ।
माम् इह अप्रतियुध्यन्तम् अन्येन च समागतम् ॥४-१७-२५॥

पूरा अध्याय