Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 17.1

ततः शरेण अभिहतो रामेण रण कर्कशः ।
पपात सहसा वाली निकृत्तैव पादपः ॥४-१७-१॥

पूरा अध्याय