ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1616.32वाल्मीकि रामायण 16.32ततो रामो महातेजा आर्तम् दृष्ट्वा हरीश्वरम् । स शरम् वीक्षते वीरो वालिनो वध कांक्षया ॥४-१६-३२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय