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वाल्मीकि रामायण 16.15

स ददर्श ततः श्रीमान् सुग्रीवम् हेम पिङ्गलम् ।
सुसंवीतम् अवष्टब्धम् दीप्यमानम् इव अनलम् ॥४-१६-१५॥

पूरा अध्याय