ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1616.11वाल्मीकि रामायण 16.11तम् तु तारा परिष्वज्य वालिनम् प्रिय वादिनी । चकार रुदती मन्दम् दक्षिणा सा प्रदक्षिणम् ॥४-१६-११॥पिछलाअगलापूरा अध्याय