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वाल्मीकि रामायण 15.24

विग्रहम् मा कृथा वीर भ्रात्रा राजन् यवीयसा ।
अहम् हि ते क्षमम् मन्ये तेन रामेण सौहृदम् ॥४-१५-२४॥

पूरा अध्याय