ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1414.5वाल्मीकि रामायण 14.5दृष्ट्वा रामम् क्रिया दक्षम् सुग्रीवो वाक्यम् अब्रवीत् । हरि वागुरया व्याप्तम् तप्त कांचन तोरणाम् ॥४-१४-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय