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वाल्मीकि रामायण 14.22

ततः स जीमूत कृत प्रणादोनादम् हि अमुंचत् त्वरया प्रतीतः ।
सूर्यात्मजः शौर्य विवृद्ध तेजाःसरित् पतिर्वा अनिल चंचल ऊर्मिः ॥४-१४-२२॥

पूरा अध्याय