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वाल्मीकि रामायण 14.20

ननर्द क्रूर नादेन विनिर्भिन्दन् इव अम्बरम् ।
तत्र शब्देन वित्रस्ता गावो यान्ति हतप्रभाः ॥४-१४-२०॥

पूरा अध्याय