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वाल्मीकि रामायण 14.15

धर्म लोभ परीतेन न च वक्ष्ये कथंचन ।
सफलाम् च करिष्यामि प्रतिज्ञाम् जहि संभ्रमम् ॥४-१४-१५॥

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