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वाल्मीकि रामायण 13.2

समुद्यम्य महत् चापम् रामः कांचन भूषितम् ।
शराम् च आदित्य संकाशान् गृहीत्वा रण साधकान् ॥४-१३-२॥

पूरा अध्याय