ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1313.17वाल्मीकि रामायण 13.17एतद् राघव विस्तीर्णम् आश्रमम् श्रम नाशनम् । उद्यान वन संपन्नम् स्वादु मूल फल उदकम् ॥४-१३-१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय