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वाल्मीकि रामायण 13.14

एष मेघ इव आकाशे वृक्ष षण्डः प्रकाशते ।
मेघ संघात विपुलः पर्यन्त कदली वृतः ॥४-१३-१४॥

पूरा अध्याय