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वाल्मीकि रामायण 12.6

स मूर्ध्ना न्यपतत् भूमौ प्रलंबीकृत भूषणः ।
सुग्रीवः परम प्रीतो राघवाय कृतांजलिः ॥४-१२-६॥

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