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वाल्मीकि रामायण 12.2

स गृहीत्वा धनुर् घोरम् शरम् एकम् च मानदः ।
सालम् उद्दिश्य चिक्षेप पूरयन् स रवैः दिशः ॥४-१२-२॥

पूरा अध्याय