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वाल्मीकि रामायण 10.3

इदम् बहु शलाकम् ते पूर्ण चन्द्रम् इव उदितम् ।
छत्रम् स वाल व्यजनम् प्रतीच्छस्व मया धृतम् ॥४-१०-३॥

पूरा अध्याय