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वाल्मीकि रामायण 10.16

प्राद्रवत् भय संत्रस्तो वीक्ष्य आवाम् समुपागतौ ।
अभिद्रुतः तु वेगेन विवेश स महाबिलम् ॥४-१०-१६॥

पूरा अध्याय